करना है हर ज़रिया आसान

सबकी है यह आकांक्षा की छू ले आसमान,

अरमान है सबका की जान पाए हर बात के पीछे छीपा ज्ञान,

है लालसा सबकी, पाना वैभव ऐश्वर्य सारा,

अपने लक्ष्य की इच्छा है, तोह हर ज़रिया हो आसान..

सौन्दर्य व धन कितनो की आकांक्षा,

हर कोई सफलता का अरमान रखता,

बस तड़प रही है इच्छाशक्ति मानवाश्रय के लिए, हर ज़रिया हो आसान..

जीवन में मुश्किलें ऐंसी, के पथिक के पथ पर काटें,

इतनी नुकीली की मनुष्य कैसे सिमटे,

पर उसी कर्मनिष्ठ व सहनशील के लिए,

जिसमे अपने धेय की इच्छा है, हर जरिया हो आसान..

विचार पाहाडो जितने ऊँचे, समुद्र-तुल्य गहरे

उस सच्चाई के बिना, मछली जल रहित जेसे तड़पे

है कितना कुछ पाना, परंतु, उसी विवेकी के लिए,

जिसमे अपने अनुभव की समझ है, हर ज़रिया हो आसान..

संसार में कुछ लोग साथ निभाने आते है,

उनके वचन व राए प्रेरणादायी हीते है,

हर हार के बाद दिलासा उन्ही से आता है..

उसी आशावादी और स्नेहभावी के लिए

जिसमे अपने लक्ष्य की अभिलाषा है,

हर ज़रिया हो आसान।

This is something which I wrote on 2nd February, 2007, more than 10 years ago. It’s close to my heart, not only for its meaning, but also as it represents my humble beginning in writing and its contribution in shaping me the way I am today.

Have a nice day, people!

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